परिचय  

रविवार, 27 सितंबर 2009

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नमस्कार दोस्तों,
राज दरबार में आपका स्वागत है। क्यूंकि यह राज दरबार की पहली सभा है इसलिए मैं चाहूँगा की इस सभा में मैं अपना परिचय आपको दू। जिससे की आप यह तो जान सके के यह सभा किस महापुरुष के आधीन है।वैसे तो हमारे बारे में शब्दों में बयां करना मुश्किल नही है, क्यूंकि यह नामुमकिन है। लकिन फिर भी कुछ तो कहना ही पडेगा आप लोग इस तरह से समझ सकते है - " इस दुनिया में २ प्रकार के लोग होते है, पहले वो जो इस दुनिया में जन्म लेते है और दूसरे वो जो इस दुनिया में अवतार लेते है, हम दूसरे किस्म के इंसान है"।


मुझे अंको के लिए पढ़ना अच्छा नही लगता, मैं केबल अपने मनोरंजन के लिए पढता हूँ, मेरा जब मन करता है, जो मन करता है वो ही पढता हूँ (अर्थात मैं कभी नही पढता)। मेरी ज़िन्दगी का सबसे खुशनसीब दिन वो था जब मैंने कक्षा 10 में 85 अंक अर्जित किए थे , वो तो 15 रुपए कम पड़ गए वरना 100 में से 100 लाता। खैर जितना दक्दीर में होता है उतना ही मिलता है.
" विजेता कुछ अलग काम नहीं करते, वो कामो को अलग तरीके से करते है "
बस यही बोल बोल कर अपने आप को तसल्ली देते रहते है.............

मुझे शायरियों को बहुत शौक है, मैं जो भी शायरियां लिखता हूँ , वो या तो मेरे दिल से होती है या फिर मेरे दिमाग से, जो मैं दिल से लिखता हूँ वो मेरे दिल से निकलती है, और जो मैं दिमाग से लिखता हूँ वो किसी और के दिल से निकलती है, दरअसल आप जो समझ रहे है वो मेरे कहने का मतलब नहीं है, लकिन आप समझ सही रहे है. मैं जल्द ही अपनी शायरी की किताब प्रकाशित करने वाला हूँ , मेरी किताब का नाम " मेरी १०० शायरियाँ है. लगभग 99 शायरियां पूरी हो चुकी है जिस दिन 100 पूरी हो जायेगी मैं प्रकाशित कर दूंगा. वैसे जब आप लोगो ने मेरे ब्लॉग पर भ्रमण (विजित) किया है तो आपको एक शायरी सुना ही देता हूँ.अर्ज़ किया है............... "
"इख्तियारे तब्बस्सुम की लौ को तर्रंनुमे नुमाइश से अगा देना,
और जो इसका मतलब समझ आजाये तो कृपया मुझे भी बता देना."
वह वह .............वह वह !!!!!!!! अजी हुज़ूर वह राज कहिये


मेरा सपना है की मैं पूरी प्रथिवी की यात्रा करू लकिन पाकिस्तान सबसे आखरी में जायूँगा, वो क्या है की वहां से आने के चांस कम ही है, इसलिए जब सारी इक्छाएं समाप्त हो जायेगी तब ही वहां जायूँगा.


मुझे "लम दंड गोल पिंड धन धना धन " (अर्थात क्रिकेट ) खेलना अच्छा लगता है, ये इसका हिंदी नाम है. मैं एक अच्छा खिलाडी नहीं वरन बहुत अच्छा खिलाडी हूँ . मैं अगर टीम में होता हूँ तो टीम 100 प्रतिशत जीत जाती है, लकिन मेरी नहीं सामने वाली.


मेरा प्रिय विषय चित्रकला (Drawing) है, क्यूंकि बचपन में मैं सिर्फ इसी विषय में पास हुआ करता था . लकिन जबसे ऍम. एफ. हुसैन साहब को चित्रकला सिखाई है तब से चित्रकला नहीं की.


मैं विज्ञानिक या फिल्म director बनना चाहता हूँ. लेकिन विज्ञानिक बनने के लिए कोई शिक्षक नहीं मिल रहा है. आइ. आइ. टी के सभी शिक्षक ने अपने अपने हाँथ खड़े कर दिए है, कहते है की इतने talented लड़के को हम नहीं पढ़ा सकते.

लेकिन फिल्म डायरेक्शन में कुछ स्कोप है. मैं अब तक २ फिल्म बना चूका हूँ और तीसरी भी बना रहा हूँ. सबसे पहले मैंने फिल्म बनायीं " लगे रहो " ये फिल्म बदनसीबी से रिलीज़ नहीं हो पाई, इसके बाद मैंने एक और फिल्म बनायीं " फिर लगे रहो ", लकिन किस्मत देखो ये फिल्म रिलीज़ तो हुई लेकिन कब आयी और कब चली गयी किसी को पता ही नहीं चला , लेकिन मैंने अभी भी हिम्मत नहीं हारी है, मैं एक और फिल्म बना रहा हूँ "फिर भी लगे रहो", और मुझे पूरा विश्वास है के ये फिल्म कम से कम रिलीज़ तो होगी ही और जनता को पता भी चलेगा. आप लोग ज़रूर देखना और कृपया इसकी piracy मत करना क्यूंकि ये आप कभी नहीं कर सकते, क्यूंकि इस फिल्म को इन्टरनेट पर अपलोड करने का किसी के पास टाइम नहीं है और इसकी CD प्रकाशित करने के लिए मेरे प्रोड्यूसर के पास पैसा नहीं बचा है.


और इससे ज्यादा हम अपनी तारीफ क्या करे, बस ये दो लाइन पढ़ कर समझ जाईये..........
" हुनर इतना तो नहीं के घर कर जायेंगे,
पर भूल भी पयोगे कुछ ऐसा कर जायेंगे "


आज की दरबार में सिर्फ इतना ही................


आपको यह दरबार कैसी लगी अपने सुझाव या कोई राय अवश्य (यदि राय अच्छी हो ) दीजिये............धन्यबाद


आपका सबसे समझदार और बुद्धिमान मित्र .........-राज



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14 comments: to “ परिचय

  • Hrishikesh Patel
    30 सितंबर 2009 को 2:40 am  

    दरबार की यह सभा वाक़ई कबिले तारीफ़ है!कुछेक जगहो पर हिन्दी का टंकण ठीक ढ़ंग से नही हो पाया,पर सभा की विषयवस्तु ने पूरे समय नज़रो को बाँधे रखते हुए,मनोरजन किया। मै लेखक को इस नये प्रयास के लि्ये बधाई देता हू।

  • जी.के. अवधिया
    30 सितंबर 2009 को 4:37 am  

    हिन्दी ब्लॉग जगत में स्वागत है आपका!

  • vikas
    30 सितंबर 2009 को 5:18 am  

    your blog very good ,
    plz visit my blog for free ebooks download
    http://free-ebooks-for-u.blogspot.com/

  • Nirmla Kapila
    30 सितंबर 2009 को 7:32 am  

    वाह जी आपने तो आते ही धमाका कर दिया ? राजा हो तो ऐसा? आप जरूर कुछ कर जायेंगे बहुत बहुत आशीर्वाद और शुभकामनायें

  • faizan
    1 अक्तूबर 2009 को 9:56 am  

    are ek dum mast blog hai yaar padhne me maza aagaya

  • raj
    1 अक्तूबर 2009 को 10:21 pm  

    apke bare me jan ke achha laga or pakistan akhir me jane ka idea bahut achha hai..kya idea hai sir ji...

  • Mumukshh Ki Rachanain
    2 अक्तूबर 2009 को 9:22 pm  

    गज़ब का राज दरबार था. मज़ा अ गया. पर बीस रुपये क्यों कम पड़ गए थे,..............११० में से १०० पाने के लिए.
    जे हो महाराज की,
    गुस्ताखी माफ़ हो तो अर्ज़ करूँ..................
    राज़ दरवार में राजा को सुनना होता, सबकी बाते और उसके अनुसार फैसला देना होता hai , पर यहां सुना गए सब आप और फैसला हम सब पर छोड़ दिया....... ये भी खूब रही.

    अब अगली बार से हम सब की टिपण्णी पहले आएगी और आपकी पोसी बाद में... क्यों महाराज कैसा रहेगा ये प्रयोग, अरे भाई प्रयोग कैसा यही तो राजदरबार का सदा से दस्तूर रहा है, और यही रहना भी चाहिए.....
    गेंद अब आपके पले में, फैसला आपको ही करना है..........

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

  • raj
    3 अक्तूबर 2009 को 6:50 am  

    गुप्ताजी आप ने बात तो ठीक कही है, लकिन राजा के दरबार में कई विषयों पर चर्चाएं भी होती है ताकि उसके मंत्री उस विषय पर अपनी अपनी राय दे और राजा का सही मार्ग दर्शन कर सके. वैसे भी मैंने पहले ही कह चूका हूँ के ये मेरी पहली दरबार है और मैं इसमें अपना परिचय देना चाहता हूँ. आगे की दरबार में हम अलग अलग विषयो पर भी चर्चा करेंगे और अपने साथ घटी कुछ घटनायों पर भी और समय आने पर फैसला भी , आप सभी मेरे मंत्री है आप से अनुरोध है के मेरा मार्गदर्शन करे.

  • rahul_gupta
    4 अक्तूबर 2009 को 5:51 am  

    My Dear,

    If only I could have come up with,
    the right words to describe the depth of this beautiful feeling that you have for us,
    The best thing that you can do is to show you now.

    rAhUl...

  • ankur
    8 अक्तूबर 2009 को 9:56 pm  

    vahhhhhhhhhhhhhh....
    apke tareph me mere pas aalaphaj nahee he...
    bas itna he kahuga its too good...
    or ha film jarur dekhana chahuga.

    _-_UD

  • √♪נ汉Ψ
    11 अक्तूबर 2009 को 11:55 am  

    gr8........
    likthe rahiyeeeee aur samay samay par anyao ke blog par apne vichar prakat kartein rahein.
    REALLY LIKE
    your blog..

  • Himanshu Karki
    18 अक्तूबर 2009 को 8:57 pm  

    hey first blog i saw in Hindi

    kewl buddy

    keep it up........

    himanshu
    http://amazing-n-weirdworld.blogspot.com

  • √♪נ汉Ψ
    19 अक्तूबर 2009 को 6:11 am  

    Nice blog and like the idea of writing in Hindi..
    keep writing
    :)
    http://scribedbyme.blogspot.com/

  • sweta
    16 जनवरी 2010 को 11:45 pm  

    nice blog,quite funny raja .....;)
    by the way can u tell the name of the hero and heroin...??
    well fully entertaining blog..
    my blog ..
    no u search it...:D

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