याददाश  

शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

उनके इश्क में ऐसा उलझे काम-तमाम भूल गए,
उनके इशारे छोड़ बाकी सब के सलाम भूल गए


सुन के उनकी बातें खुद के कलाम भूल गए,
खो के उनकी जुल्फों में कल की शाम भूल गए


उनकी आँखों से पीने में सारे जाम भूल गए,
पूजा उनको इतना अब तो अल्लाह-राम भूल गए


उनकी मोहब्बत के सिवा सारे इलज़ाम भूल गए,
उनको इतना सोचा की खुद का नाम भूल गए 



इतनी रहमत कर खुदा उनके जनाज़े के साथ मेरी लाश चली जाये,
याद रहे बस वो मौला बाकी याददाश चली जाये...........................राज 


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