गुज़रेंगे  

बुधवार, 12 मई 2010



हुई मोहब्बत सुन बेरहम तुझसे,
के आशिकी मे तेरी सुरत-ए-हाल गुज़रेंगे,
मुश्किल हुए अब दिनो को काटना,
के जाने कैसे अब ये साल गुज़रेंगे ।

कबसे खडे है दीदार को तेरे,
लोग कहते है मेरे यार गुज़रेंगे,
दो झलक मिले तो सुकुन आये दिल को,
जाने अब कब ये मौसम-ए-बहार गुज़रेंगे ।

हुई मुददत के अब न रहा इंतज़ार बाकि,
तेरे दर से अबकी ऐ गद्दार गुज़रेंगे,
तुझसे मिलने की चाह में मौत से मिल बैठे,
हम अबकी मैयत पे सवार गुज़रेंगे .....................


                                                                       - राज

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