सुकुन  

मंगलवार, 7 सितंबर 2010





मिले सुकूं कहीं ऐसी कोई बात हो,
मै हूँ तनहा और मेरे जज़्बात हो,
हुए महफ़िल से मायूश बहुत हम आज,
डशे ख़ामोशी, काश ऐसी कोई रात हो.................
                                                                           - राज 

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1 comments: to “ सुकुन

  • Udan Tashtari
    7 सितंबर 2010 को 6:22 pm  

    बहुत खूब!


    कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

    नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि '९०% सीख प्रोत्साहान देता है.'

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