अक्सर .....  

रविवार, 2 जून 2013


ले के हाथ कटोरा भीख मागते क्यो है हम,
अक्सर घर जल जाने के बाद जागते क्यो है हम.

क्यो इन्तेजार करते है किसी की अस्मित लुटने का,
क्यो राह तकते है चौराहे पर भीड जुटने  का,
एक और बेटी के मरने की राह ताकते क्यो है हम,
अक्सर घर जल जाने के बाद जागते क्यो है हम

छुप गये है आज जैसे हम घरो के कोने मे,
खुशनसीब समझते है खुद को बेशर्म होने मे,
एक दूसरे के चेहरे आज भी ताकते क्यो है हम,
अक्सर घर जल जाने के बाद जागते क्यो है हम

पूजा जिसको हमने सदियो से मन्दीरो मे,
क्यो बंधी है आज भी वो रिवाजो की जंजीरो मे,
उस बेटी को बोझ आज भी आकते क्यो है हम,
अक्सर घर जल जाने के बाद जागते क्यो है हम,

अक्सर घर जल जाने के बाद जागते क्यो है हम.........
                                        - राज 

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