बचपन की फ़रियादे  

शनिवार, 7 मई 2016


बचपन की कुछ नाजायज फ़रियादे अब भी वाकी है,
दिल के कोने मे सिमटी कुछ यादे अब भी वाकी है|
वाकी है वो साईकिल लेना पैसे जिसके मैने जोडे थे,
तब शायद गुल्लक मे मेरी सिक्के बहुत हि थोडे थे|
और भी वाकी है कुछ सपने जो तकिये मे लिपटे थे,
गेहरी प्यारी सी नींदो के ख्यावो मे जो दिखते थे|

बचपन की कुछ नाजायज फ़रियादे अब भी वाकी है........
                                 - राज 

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