तुम आए ......  

मंगलवार, 9 अगस्त 2016

आए थे मेरे बागो में
जो कुछ रोज़ पहले
और सूखे पत्तों पर तुम 
कुछ देर थे टहले
मटमैली पोशाक में जो तुमने फूलो को तोडा
बिना परवाह किये उन पत्तों की 
जो कदमो के नीचे दबे थे 
उन पत्तों के बीच एक दिल भी था 
तेरे कदमो से बिस्मिल भी था 
लेकिन खुश था 
के तुम आए दिल में मेरे 
                                   - राज 

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कुछ कंकर और मिट्टी  

शनिवार, 16 जुलाई 2016

आज भी मेरी जेबो मे कुछ कंकर और मिट्टी है,
अलमारी के कोनो मे रखी जैसे कुछ चिट्ठी है,
कुछ तेरे खत है, कुछ मेरे खत है, और कुछ खत हम दोनो के,
बन गए है हिस्से जैसे, अलमारी के कोनो के,
और पडी है एक डायरी मेरी, कुछ खाली पन्नो के साथ,
जज़्बातो की कमी नही, पर रह गया मै खाली हाथ,
कुछ पत्ती और फूल भी, हिस्से हो गए डायरी के,
बन के टुकडे पडे हुए है, अब भी मेरी शायरी के,
उल्झी हुई सी कुछ ज़िन्दगी मानो उसमे लिप्टी है,
आज भी मेरी जेबो मे कुछ कंकर और मिट्टी है । 
                                      - राज 

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बचपन की फ़रियादे  

शनिवार, 7 मई 2016


बचपन की कुछ नाजायज फ़रियादे अब भी वाकी है,
दिल के कोने मे सिमटी कुछ यादे अब भी वाकी है|
वाकी है वो साईकिल लेना पैसे जिसके मैने जोडे थे,
तब शायद गुल्लक मे मेरी सिक्के बहुत हि थोडे थे|
और भी वाकी है कुछ सपने जो तकिये मे लिपटे थे,
गेहरी प्यारी सी नींदो के ख्यावो मे जो दिखते थे|

बचपन की कुछ नाजायज फ़रियादे अब भी वाकी है........
                                 - राज 

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