तुम आए ......  

मंगलवार, 9 अगस्त 2016

आए थे मेरे बागो में
जो कुछ रोज़ पहले
और सूखे पत्तों पर तुम 
कुछ देर थे टहले
मटमैली पोशाक में जो तुमने फूलो को तोडा
बिना परवाह किये उन पत्तों की 
जो कदमो के नीचे दबे थे 
उन पत्तों के बीच एक दिल भी था 
तेरे कदमो से बिस्मिल भी था 
लेकिन खुश था 
के तुम आए दिल में मेरे 
                                   - राज 

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